वाल्मीकि रामायण 2.106.8
प्रोषिते मयि यत्पापं मात्रा मत्कारणात्कृतम् ।क्षुद्रया तदनिष्टं मे प्रसीदतु भवान्मम॥
proṣite mayi yatpāpaṃ mātrā matkāraṇātkṛtam |kṣudrayā tadaniṣṭaṃ me prasīdatu bhavānmama ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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