वाल्मीकि रामायण 2.108.4
तस्मान्माता पिता चेति राम सज्जेतयो नर: ।उन्मत्त इव स ज्ञेयो नास्ति कश्चिद्धि कस्यचित्॥
tasmānmātā pitā ceti rāma sajjetayo nara: |unmatta iva sa jñeyo nāsti kaściddhi kasyacit ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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