वाल्मीकि रामायण 2.112.8
ह्लादितस्तेन वाक्येन शुभेन शुभदर्शन: ।राम: संहृष्टवदनस्तानृषीनभ्यपूजयत्॥
hlāditastena vākyena śubhena śubhadarśana: |rāma: saṃhṛṣṭavadanastānṛṣīnabhyapūjayat ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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