वाल्मीकि रामायण 2.116.2
ये तत्र चित्रकूटस्य पुरस्तात्तापसाश्रमे ।राममाश्रित्य निरतास्तानलक्षयदुत्सुकान्॥
ye tatra citrakūṭasya purastāttāpasāśrame |rāmamāśritya niratāstānalakṣayadutsukān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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