वाल्मीकि रामायण 2.116.3
नयनैर्भुकुटीभिश्च रामं निर्दिश्य शङ्किता: ।अन्योन्यमुपजल्पन्त: शनैश्चक्रुर्मिथ: कथा:॥
nayanairbhukuṭībhiśca rāmaṃ nirdiśya śaṅkitā: |anyonyamupajalpanta: śanaiścakrurmitha: kathā: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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