वाल्मीकि रामायण 2.116.4
तेषामौत्सुक्यमालक्ष्य रामस्त्वात्मनि शङ्कित: ।कृताञ्जलिरुवाचेदमृषिं कुलपतिं तत:॥
teṣāmautsukyamālakṣya rāmastvātmani śaṅkita: |kṛtāñjaliruvācedamṛṣiṃ kulapatiṃ tata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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