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वाल्मीकि रामायण 2.14.31
तदन्तः पुरमासाद्य व्यतिचक्राम तम् जनम्॥
tadantaḥ puramāsādya vyaticakrāma tam janam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलेंतदन्तः पुरमासाद्य व्यतिचक्राम तम् जनम्॥
tadantaḥ puramāsādya vyaticakrāma tam janam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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