वाल्मीकि रामायण 2.27.14
सह त्वया गमिश्यामि वसमद्य न सम्शयः ।नाहम् शक्या महाभाग निवर्तयितु मुद्यता॥
saha tvayā gamiśyāmi vasamadya na samśayaḥ |nāham śakyā mahābhāga nivartayitu mudyatā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें