वाल्मीकि रामायण 2.29.14
प्रसादितः च वै पूर्वम् त्वम् वै बहु विधम् प्रभो ।गमनम् वन वासस्य कान्क्षितम् हि सह त्वया॥
prasāditaḥ ca vai pūrvam tvam vai bahu vidham prabho |gamanam vana vāsasya kānkṣitam hi saha tvayā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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