वाल्मीकि रामायण 2.3.46
तस्मात्त्वमपि चात्मानं नियम्यैवं समाचर ।तच्छ्रुत्वा सुहृदस्तस्य रामस्य प्रियकारिणः॥
tasmāttvamapi cātmānaṃ niyamyaivaṃ samācara |tacchrutvā suhṛdastasya rāmasya priyakāriṇaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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