वाल्मीकि रामायण 2.57.2
भरद्वाजाभिगमनम् प्रयागे च सहासनम् ।आगिरेर्गमनम् तेषाम् तत्रस्थैरभिलक्षितम्॥
bharadvājābhigamanam prayāge ca sahāsanam |āgirergamanam teṣām tatrasthairabhilakṣitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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