वाल्मीकि रामायण 2.57.5
ततः साय अह्न समये तृतीये अहनि सारथिः ।अयोध्याम् समनुप्राप्य निरानन्दाम् ददर्श ह॥
tataḥ sāya ahna samaye tṛtīye ahani sārathiḥ |ayodhyām samanuprāpya nirānandām dadarśa ha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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