वाल्मीकि रामायण 2.63.20
आकुलारुणतोयानि स्रोओताम्सि विमलान्यपि ।उन्मार्गजलवाहीनि बभूवुर्जलदागमे॥
ākulāruṇatoyāni srootāmsi vimalānyapi |unmārgajalavāhīni babhūvurjaladāgame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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