वाल्मीकि रामायण 2.64.59
तदेतच्चिन्तयानेन स्मऋतम् पापम् मया स्वयम् ।तदा बाल्यात्कृतम् देवि शब्दवेध्यनुकर्षिणा॥
tadetaccintayānena smaṛtam pāpam mayā svayam |tadā bālyātkṛtam devi śabdavedhyanukarṣiṇā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें