वाल्मीकि रामायण 2.67.28
न अराजके जनपदे चन्दनागुरुरूषिताः ।राजपुत्रा विराजन्ते वसन्त इव शाखिनः॥
na arājake janapade candanāgururūṣitāḥ |rājaputrā virājante vasanta iva śākhinaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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