वाल्मीकि रामायण 2.71.3
एल धाने नदीम् तीर्त्वा प्राप्य च अपर पर्पटान् ।शिलाम् आकुर्वतीम् तीर्त्वाआग्नेयम् शल्य कर्तनम्॥
ela dhāne nadīm tīrtvā prāpya ca apara parpaṭān |śilām ākurvatīm tīrtvāāgneyam śalya kartanam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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