वाल्मीकि रामायण 2.8.14
धर्मज्ञो गुरुभिर्दान्तः कृतज्ञ सत्यवाक्चुचि ।रामो राज्ञः सुतो ज्येष्ठो यौवराज्यमतोऽर्हति॥
dharmajño gurubhirdāntaḥ kṛtajña satyavākcuci |rāmo rājñaḥ suto jyeṣṭho yauvarājyamato'rhati ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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