वाल्मीकि रामायण 2.90.1
भरद्वाजाश्रमं दृष्ट्वा क्रोशादेव नरर्षभ: ।बलं सर्वमवस्थाप्य जगाम सह मन्त्रिभि:॥
bharadvājāśramaṃ dṛṣṭvā krośādeva nararṣabha: |balaṃ sarvamavasthāpya jagāma saha mantribhi: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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