वाल्मीकि रामायण 2.91.77
प्रतिपानह्रदान् पूर्णान् खरोष्ट्रगजवाजिनाम् ।अवगाह्य सुतीर्थांश्च ह्रदान् सोत्पलपुष्करान्॥
pratipānahradān pūrṇān kharoṣṭragajavājinām |avagāhya sutīrthāṃśca hradān sotpalapuṣkarān ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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