वाल्मीकि रामायण 2.97.24
एतौ तौ सम्प्रकाशेते गोत्रवन्तौ मनोरमौ।वायुवेगसमौ वीर जवनौ तुरगोत्तमौ॥
etau tau samprakāśete gotravantau manoramau |vāyuvegasamau vīra javanau turagottamau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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