वाल्मीकि रामायण 2.97.25
स एष सुमहाकाय: कम्पते वाहिनीमुखे।नाग: शत्रुञ्जयो नाम वृद्धस्तातस्य धीमत:॥
sa eṣa sumahākāya: kampate vāhinīmukhe |nāga: śatruñjayo nāma vṛddhastātasya dhīmata: ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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