वाल्मीकि रामायण 3.11.39
पद्मिन्यो विविधाः तत्र प्रसन्न सलिल आशयाः ।हंस कारण्डव आकीर्णाः चक्रवाक उपशोभिताः॥
padminyo vividhāḥ tatra prasanna salila āśayāḥ |haṃsa kāraṇḍava ākīrṇāḥ cakravāka upaśobhitāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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