वाल्मीकि रामायण 3.11.8
ततः कौतूहलात् रामो लक्ष्मणः च महारथः ।मुनिम् धर्मभृतम् नाम प्रष्टुम् समुपचक्रमे॥
tataḥ kautūhalāt rāmo lakṣmaṇaḥ ca mahārathaḥ |munim dharmabhṛtam nāma praṣṭum samupacakrame ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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