वाल्मीकि रामायण 3.37.14
कथम् नु तस्य वैदेहीम् रक्षिताम् स्वेन तेजसा ।इच्छसे प्रसभम् हर्तुम् प्रभाम् इव विवस्वतः॥
katham nu tasya vaidehīm rakṣitām svena tejasā |icchase prasabham hartum prabhām iva vivasvataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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