वाल्मीकि रामायण 3.40.5
यः त्यक्त्वा सुहृदो राज्यम् मातरम् पितरम् तथा ।स्त्री वाक्यम् प्राकृतम् श्रुत्वा वनम् एक पदे गतः॥
yaḥ tyaktvā suhṛdo rājyam mātaram pitaram tathā |strī vākyam prākṛtam śrutvā vanam eka pade gataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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