वाल्मीकि रामायण 3.42.3
न हि रामम् पराक्रम्य जीवन् प्रति निवर्तते ।वर्तते प्रति रूपो असौ यम दण्ड हतस्य ते॥
na hi rāmam parākramya jīvan prati nivartate |vartate prati rūpo asau yama daṇḍa hatasya te ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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