वाल्मीकि रामायण 3.42.4
किम् नु कर्तुम् मया शक्यम् एवम् त्वयि दुरात्मनि ।एष गच्छामि अहम् तात स्वस्ति ते अस्तु निशाचरः॥
kim nu kartum mayā śakyam evam tvayi durātmani |eṣa gacchāmi aham tāta svasti te astu niśācaraḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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