वाल्मीकि रामायण 3.46.2
तदा आसाद्य दशग्रीवः क्षिप्रम् अंतरम् आस्थितः ।अभिचक्राम वैदेहीम् परिव्राजक रूप धृक्॥
tadā āsādya daśagrīvaḥ kṣipram aṃtaram āsthitaḥ |abhicakrāma vaidehīm parivrājaka rūpa dhṛk ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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