वाल्मीकि रामायण 3.50.5
लोकानाम् च हिते युक्तो रामो दशरथ आत्मजः ।तस्य एषा लोक नाथस्य धर्म पत्नी यशस्विनी॥
lokānām ca hite yukto rāmo daśaratha ātmajaḥ |tasya eṣā loka nāthasya dharma patnī yaśasvinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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