वाल्मीकि रामायण 3.50.4
जटायुः नाम नाम्ना अहम् गृध्र राजो महाबलः ।राजा सर्वस्य लोकस्य महेन्द्र वरुण उपमः॥
jaṭāyuḥ nāma nāmnā aham gṛdhra rājo mahābalaḥ |rājā sarvasya lokasya mahendra varuṇa upamaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें