वाल्मीकि रामायण 3.61.3
क्व नु लक्ष्मण वैदेही कम् वा देशम् इतो गता ।केन आहृता वा सौमित्रे भक्षिता केन वा प्रिया॥
kva nu lakṣmaṇa vaidehī kam vā deśam ito gatā |kena āhṛtā vā saumitre bhakṣitā kena vā priyā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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