वाल्मीकि रामायण 3.61.4
वृक्षेण आवार्य यदि माम् सीते हसितुम् इच्छसि ।अलम् ते हसितेन अद्य माम् भजस्व सुदुःखितम्॥
vṛkṣeṇa āvārya yadi mām sīte hasitum icchasi |alam te hasitena adya mām bhajasva suduḥkhitam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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