वाल्मीकि रामायण 3.61.5
यैः सह क्रीडसे सीते विश्वस्तैः मृग पोतकैः ।एते हीनाः त्वया सौम्ये ध्यायन्ति अस्र आविल ईक्षणाः॥
yaiḥ saha krīḍase sīte viśvastaiḥ mṛga potakaiḥ |ete hīnāḥ tvayā saumye dhyāyanti asra āvila īkṣaṇāḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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