वाल्मीकि रामायण 3.74.2
तौ शैलेषु आचित अनेकान् क्षौद्र कल्प फल द्रुमान् ।वीक्षन्तौ जग्मतुः द्रष्टुम् सुग्रीवम् राम लक्ष्मणौ॥
tau śaileṣu ācita anekān kṣaudra kalpa phala drumān |vīkṣantau jagmatuḥ draṣṭum sugrīvam rāma lakṣmaṇau ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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