वाल्मीकि रामायण 4.16.2
गर्जतो अस्य च सुसंरब्धम् भ्रातुः शत्रोर् विशेषतः ।मर्षयिष्यामि केन कारणेन वरानने॥
garjato asya ca susaṃrabdham bhrātuḥ śatror viśeṣataḥ |marṣayiṣyāmi kena kāraṇena varānane ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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