वाल्मीकि रामायण 4.17.3
अस्मिन् निपतिते भूमौ हरि ऋषाणाम् गणेश्वरे ।नष्ट चन्द्रम् इव व्योम न व्यराजत मेदिनी॥
asmin nipatite bhūmau hari ṛṣāṇām gaṇeśvare |naṣṭa candram iva vyoma na vyarājata medinī ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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