वाल्मीकि रामायण 4.17.4
भूमौ निपतितस्य अपि तस्य देहम् महात्मनः ।न श्रीर् जहाति न प्राणा न तेजो न पराक्रमः॥
bhūmau nipatitasya api tasya deham mahātmanaḥ |na śrīr jahāti na prāṇā na tejo na parākramaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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