वाल्मीकि रामायण 4.18.12
त्वम् तु संक्लिष्ट धर्मः च कर्मणा च विगर्हितः ।काम तंत्र प्रधानः च न स्थितो राज वर्त्मनि॥
tvam tu saṃkliṣṭa dharmaḥ ca karmaṇā ca vigarhitaḥ |kāma taṃtra pradhānaḥ ca na sthito rāja vartmani ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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