वाल्मीकि रामायण 4.18.3
धर्मार्थगुण सम्पन्नम् हरीश्वरमनुत्तमम् ।अधिक्षिप्तस्तदा रामः पश्चात् वालिनम् अब्रवीत्॥
dharmārthaguṇa sampannam harīśvaramanuttamam |adhikṣiptastadā rāmaḥ paścāt vālinam abravīt ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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