वाल्मीकि रामायण 4.18.4
धर्मम् अर्थञ्च कामञ्च समयञ्च अपि लौकिकम् ।अविज्ञाय कथम् बाल्यात् माम् इह अद्य विगर्हसे॥
dharmam arthañca kāmañca samayañca api laukikam |avijñāya katham bālyāt mām iha adya vigarhase ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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