वाल्मीकि रामायण 4.18.45
प्रत्युवाच ततो रामम् प्रांजलिर् वानरेश्वरः ।यत् त्वम् आत्थ नरश्रेष्ठ तत् थथा एव न अत्र संशयः॥
pratyuvāca tato rāmam prāṃjalir vānareśvaraḥ |yat tvam āttha naraśreṣṭha tat thathā eva na atra saṃśayaḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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