वाल्मीकि रामायण 4.2.11
आप्लवन्तो हरिवराः सर्वतः तम् महागिरिम् ।मृग मार्जार शार्दूलान् त्रासयन्तो ययुः तदा॥
āplavanto harivarāḥ sarvataḥ tam mahāgirim |mṛga mārjāra śārdūlān trāsayanto yayuḥ tadā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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