वाल्मीकि रामायण 4.23.2
शेषे त्वम् विषमे दुःखम् अकृत्वा वचनम् मम ।उपल उपचिते वीर सुदुःखे वसुधा तले॥
śeṣe tvam viṣame duḥkham akṛtvā vacanam mama |upala upacite vīra suduḥkhe vasudhā tale ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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