वाल्मीकि रामायण 4.23.5
ऋक्ष वानर मुख्याः त्वाम् बलिनम् पर्युपासते ।तेषाम् विलपितम् कृच्छ्रम् अंगदस्य च शोचतः॥
ṛkṣa vānara mukhyāḥ tvām balinam paryupāsate |teṣām vilapitam kṛcchram aṃgadasya ca śocataḥ ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें