वाल्मीकि रामायण 4.25.2
न शोक परितापेन श्रेयसा युज्यते मृतः ।यद् अत्र अनंतरम् कार्यम् तत् समाधातुम् अर्हथ॥
na śoka paritāpena śreyasā yujyate mṛtaḥ |yad atra anaṃtaram kāryam tat samādhātum arhatha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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