वाल्मीकि रामायण 4.27.3
ऋक्ष वानर गोपुच्छैः मार्जारैः च निषेवितम् ।मेघ राशि निभम् शैलम् नित्यम् शुचिकरम् शिवम्॥
ṛkṣa vānara gopucchaiḥ mārjāraiḥ ca niṣevitam |megha rāśi nibham śailam nityam śucikaram śivam ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
पुस्तक में खोलें