वाल्मीकि रामायण 4.27.4
तस्य शैलस्य शिखरे महतीम् आयताम् गुहाम् ।प्रत्यगृह्णीत वासार्थम् रामः सौमित्रिणा सह॥
tasya śailasya śikhare mahatīm āyatām guhām |pratyagṛhṇīta vāsārtham rāmaḥ saumitriṇā saha ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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