वाल्मीकि रामायण 4.39.36
नलः च अपि महावीर्यः संवृतो द्रुम वासिभिः ।कोटी शतेन संप्राप्तः सहस्रेण शतेन च॥
nalaḥ ca api mahāvīryaḥ saṃvṛto druma vāsibhiḥ |koṭī śatena saṃprāptaḥ sahasreṇa śatena ca ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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