वाल्मीकि रामायण 4.39.6
जहार आत्म विनाशाय वैदेहीम् राक्षस अधमः ।वंचयित्वा तु पौलोमीम् अनुह्लादो यथा शचीम्॥
jahāra ātma vināśāya vaidehīm rākṣasa adhamaḥ |vaṃcayitvā tu paulomīm anuhlādo yathā śacīm ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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