वाल्मीकि रामायण 4.39.7
न चिरात् तम् हनिष्यामि रावणम् निशितैः शरैः ।पौलोम्याः पितरम् दृप्तम् शत क्रतुः इव अरिहा॥
na cirāt tam haniṣyāmi rāvaṇam niśitaiḥ śaraiḥ |paulomyāḥ pitaram dṛptam śata kratuḥ iva arihā ||
इस श्लोक का हमारा सरल अर्थ विद्वत् समीक्षा की प्रतीक्षा में है।
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